राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा एवं यू.टी.डी. के संयुक्त तत्वावधान में वीरांगना रानी दुर्गावती जी की 502वीं जयंती का आयोजन शौर्य, स्वाभिमान एवं नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वीरांगना रानी दुर्गावती जी एवं राजा शंकर शाह की प्रतिमा पर मुख्य अतिथि कार्यपरिषद सदस्य श्री हरीश तिवारी, विशिष्ट अतिथि विद्या भारती जिला सह सचिव श्री नितिन चौधरी, मुख्य वक्ता डॉ. धनाराम, कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी एवं कुलसचिव श्री दशरथ सिंह गौड़ द्वारा माल्यार्पण कर किया गया।
मुख्य अतिथि कार्यपरिषद सदस्य श्री हरीश तिवारी ने अपने उद्बोधन में रानी दुर्गावती के जीवन को वीरता, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की अद्वितीय मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती का जीवन साहस, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की अमर गाथा है। उनकी 502वीं जयंती हमें अपने स्वाभिमान और संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने उनके महान व्यक्तित्व को शत्-शत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
खास बातें
- उनकी 502वीं जयंती हमें अपने स्वाभिमान और संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने की प्रेरणा देती है।
- उनकी 502वीं जयंती पर उनके संघर्ष और बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा समाजहित में कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।
- उनकी 502वीं जयंती पर उन्हें सादर नमन करते हुए उनके साहस, स्वाभिमान, न्यायप्रियता और त्याग से प्रेरणा लेने का संकल्प लें तथा नई पीढ़ी को उनकी गौरवगाथा से परिचित कराएं।
विशिष्ट अतिथि विद्या भारती जिला सह सचिव श्री नितिन चौधरी ने वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन करते हुए कहा कि उनका अदम्य साहस, स्वाभिमान, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण सभी के लिए प्रेरणादायी है। उनके आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र की सेवा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम अध्यक्ष एवं कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी ने अपने प्रबोधन में वीरांगना रानी दुर्गावती की गौरवगाथा, शौर्य, साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती का व्यक्तित्व अदम्य साहस, कुशल नेतृत्व और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। उनकी 502वीं जयंती पर उनके संघर्ष और बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा समाजहित में कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए।
मुख्य वक्ता एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. धनाराम ने रानी दुर्गावती को नारी शक्ति, वीरता और राष्ट्रभक्ति की अमर प्रतीक बताते हुए कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास में नारी शक्ति और वीरता की अद्वितीय प्रतीक हैं। उनकी 502वीं जयंती पर उन्हें सादर नमन करते हुए उनके साहस, स्वाभिमान, न्यायप्रियता और त्याग से प्रेरणा लेने का संकल्प लें तथा नई पीढ़ी को उनकी गौरवगाथा से परिचित कराएं।
कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन सहायक कुलसचिव सुश्री अंजली चौहान ने किया तथा मंच संचालन श्री मिथलेश यादव द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री तिवारी, विशिष्ट अतिथि श्री चौधरी, मुख्य वक्ता डॉ. धनाराम, कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. त्रिपाठी, कुलसचिव श्री दशरथ सिंह गौड़, वित्त अधिकारी श्रीमती गायत्री कोष्टा, सहायक कुलसचिव श्री वैदूर्यमणि तिवारी, श्री प्रमोद झाड़े सहित अधिकारी, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।


