छत्ता तराजू नहीं। रैपुरा रेंज, भरतला बीट। रामडोल की झिरिया, दाने बाबा की झिरिया। जल गंगा संवर्धन अभियान में सफाई और मरम्मत लिखी गई। विज्ञप्ति कहती है, भीषण गर्मी में भी इनमें जल बना हुआ है।

जल के साथ पक्षियों की वापसी। दूधराज (एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर), ब्लैक-नैप्ड मोनार्क, किंगफिशर, बाज, उल्लू, मोर, हरियल, जंगली मुर्गा। कई घोंसलों में अंडे। स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों ने पिछली गर्मियों तक झिरियाँ सूखने की बात कही।

शहद दिखना, शहद तौलना

प्राकृतिक जल स्रोतों के आसपास बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्ते अब शहद से भरे दिखाई दे रहे हैं। मधु इस वाक्य को मंडी आवक नहीं बनाती। तितलियों और छोटे जीवों के लिए आश्रय बताया गया। चित्र 28 मई विज्ञप्ति का फ्रेम है, छत्ता तुलाई का नहीं।

मुख्य बातें

  • दो नामित झिरियाँ; गर्मी में जल बना—अभियान की पंक्ति।
  • छत्ते शहद से भरे दिखाई दिए: अवलोकन है, तुलाई नहीं।
  • तितली-मधुमक्खी आश्रय वाक्य है; प्रजाति जनगणना नहीं।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · धरती की बुझी प्यास से दक्षिण पन्ना की झिरियों में फिर लौटी जैव-विविधता ↗28 मई 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।

यह खबर शेयर करें