राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर हरदा में कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला किसानों एवं कृषि सखियों को वैज्ञानिक खेती, नरवाई प्रबंधन, प्राकृतिक खेती तथा आगामी रबी सीजन की तैयारियों के संबंध में विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को बीमा पॉलिसियों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में कृषि स्थायी समिति के सभापति श्री ललित पटेल, परियोजना संचालक (आत्मा) श्री प्रताप सिंह निगवाल, कृषि विज्ञान केंद्र कोलीपुरा की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संध्या मुरे, वैज्ञानिक डॉ. ओ.पी. भारती, डॉ. मुकेश कुमार बकोलिया, डॉ. आर.सी. जाटव, सहायक संचालक कृषि श्री अखिलेश पटेल, श्री रामकृष्ण मंडलोई सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कृषि सखियां एवं कृषकगण उपस्थित रहे। नरवाई प्रबंधन और प्राकृतिक खेती पर दिया जोर --- वैज्ञानिकों ने किसानों को नरवाई नहीं जलाने तथा फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने से मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण का संरक्षण किया जा सकता है। साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, स्थानीय संसाधनों के उपयोग तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी गई। रबी फसलों की तैयारी के बताए वैज्ञानिक तरीके --- आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को चना एवं गेहूं सहित प्रमुख फसलों की समय पर बोनी, उन्नत बीजों का चयन, बीजोपचार, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा खेत की उचित तैयारी के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। वैज्ञानिकों ने बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए कृषि की उन्नत तकनीकों को अपनाने की सलाह दी। फसल बीमा पॉलिसियों का वितरण --- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ कार्यक्रम के तहत किसानों को बीमा पॉलिसियों का वितरण किया गया। इस दौरान किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य जोखिमों से फसलों की सुरक्षा के लिए फसल बीमा के महत्व तथा योजना से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में महिला किसानों, कृषि सखियों एवं कृषकों को नरवाई नहीं जलाने, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने तथा पर्यावरण एवं मृदा संरक्षण के लिए शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, रबी फसलों की बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।


